फोन कॉल | एक अनोखे प्यार की दास्तान | पार्ट 05

फोन कॉल | एक अनोखे प्यार की दास्तान | पार्ट 05

आबान आज घर पर ही था, कल रात ही वह मुंबई से वापिस आया था. बिज़नेस ट्रिप पे गया था. सो कर उठा था और कॉफी पी रहा था स्टडी मे। स्टडी मैं बैठा कुछ सोच रहा था की सनम का मैसेज आया. 

सनम – क्या हो रहा है जनाब?

आबान – कुछ ख़ास नहीं चुड़ैल आंटी, बस थोड़ा काम कर रहे थे. आप बताइये।

सनम – हम तो बस वेल्ले बैठए हुवे हैं. छै दिन हुवे, तुमने न कॉल की न मैसेज। क्या हुवा कोई बात हो तो बताओ। हमसे कोई खता हुई क्या ?

आबान – अरे नहीं ऐसा नहीं है. हम ज़रा काम मैं मसरूफ हो गए थे. पापा के साथ हम आउटस्टेशन गए थे. ऑफिस के वर्क से. वहाँ फुर्सत नहीं मिली।  कल रात ही तो ए है. आज आपको कॉल करता ज़रूर पर उससे पहले आपका मैसेज आ गया.

फोन कॉल | एक अनोखे प्यार की दास्तान | पार्ट 05

सनम – बहाना न बनाओ, अगर याद आ रही होती और कॉल करनी होती तो सुबह से कर सकते थे. जब हमने की तभी याद आयी.

आबान – अरे हम सच बोल रहे हैं. अभी घंटे भर पहले ही तो उठे हैं सो कर. 

सनम – सच बोल रहे हो ?

आबान – जी पक्का वाला सच.

सनम – चलो मान लेती हूँ और कर लेती हूँ तुमपे यक़ीन, पर एक बात सुन लो कान खोल के की अगली बार अगर ऐसा हुवा तो हम तुमसे कभी भी बात नहीं करेंगे। हमे बिना बताये अगर कहीं गए तो अच्छा नहीं होगा।

आबान – इतना गुस्सा आता है तुमको। यह हमको पता नहीं था. 

सनम – अभी गुस्सा देखा कब है तुमने, पकड़ कर कूट देते हैं हम जब हमको गुस्सा आता है.

आबान – अरे बाबा रे. मैं तो डर गया आपसे। 

सनम – एक बात बताये तुमको, हमको तुम्हारी आदत लगने लगी है. तुम इतने दिन मिसिंग रहे तो मुझे बड़ा अजीब लगा. हमको लगा की कहीं जो हमने तुमसे अपने रिश्ते के बारे में डिसकस किया था. हमको लगा की कही तुम यह न सोचो की अभी दिन ही कितने हुवे हैं, और सिर्फ एक मुलाक़ात मैं कौन रिश्ते की गहराई मैं जाता है. बस हम इसी वजह से परेशान थे. 

सनम एक दम से काफी संजीदा हो गयी थी. उसकी आवाज़ मैं फ़िक्र और नाराज़गी झलक रही थी. वह बिलकुल चुप हो गयी थी.

आबान ने पहली बार सनम का ऐसा रवैया देखा था. सनम कुछ अलग ही लग रही थी. हसने वाली लापरवाह सनम इतनी संजीदा भी हो सकती है, उसको अंदाजा नहीं था.

सनम ने अपनी ख़ामोशी तोड़ी। वह बोली आप फ्री कब होंगे। मुझे आपसे कुछ ज़रूरी बात करनी है. जिसका मेरे और आपके रिश्ते का वजूद टिका हुवा है. 

आबान बोला अरे इतना क्यों गुस्सा हो रही हो, कभी कभी होता है. मेरे दूसरे दोस्त भी कहते है की मैं गधे के सर पे सींग की तरह क्यों गायब हो जाता हूँ. और तुम प्लीज सीरियस मत हुवा करो. मुझे तुम्हारी पागल पाने वाली बातें ही पसंद हैं और तुम्हारी वजह से ही मैं इतनी सीरियस लाइफ मैं हंस लेता हूँ. 

सनम का मूड आज सीरियस ही था. वह बोली तो क्या आपके लिए मैं और बाकी सब दोस्तों मैं कोई फरक नहीं है. मैं सिर्फ इस लिए हूँ की आप बोर न हों ? मुझे लगा की हम दोनों का रिश्ता कुछ अलग है और वह कुछ मायने रखता है आपके लिए. पर आप तो उसको बाकी दोस्तों की तरह निबाह रहे हैं.

आबान के कुछ समझ नहीं आ रहा था की आज सनम क्यों इतना बदली बदली हुई है. इतना सीरियस क्यों है. कुछ सोचते हुवे वह बोला, मुझे माफ़ कर दो, मैं रिश्ते निभाने में इतना अच्छा नहीं हूँ. वजह है और बहुत बड़ी. ऐसा नहीं है की मैं सब रिश्तों को एक नज़र से देखता हूँ. पर जिस रस्ते पे तुम चल रही हो उस रस्ते पे चलने से मुझे बहुत दर लगता है. क्यों लगता है वह मैं तुमको बता देता हूँ. आज शाम को मिलते हैं सिटी मॉल में. 

सनम बोली ठीक है, मुझे भी आपसे कुछ ज़रूरी बात करनी है. इस रिश्ते का वजूद अब इन्ही बातों पे टिका हुवा है. 

यह कह के सनम ने फ़ोन रख दिया।

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