फोन कॉल | एक अनोखे प्यार की दास्तान | पार्ट 02

फ्रेश हो कर उसने फोन उठाया और नीचे आ गया. अम्मी के साथ उसने शाम की चाय पी. अभी तक वो सनम को दिमाग़ से निकल नहीं पाया था. अजीब लग रहा था उसको. ना उसने कोई ख़ास बात करी फिर भी उसका दिल इस लड़की से बात करना चाहता है.

आबान उठा और उसने अपना कंप्यूटर ऑन किया. कुछ ए-मेल को रिप्लाइ किया. ना जाने क्यूँ उसने अपना फ़ेसबुक अकाउंट लोजीन किया. शायद जबसे उसका प्रोफाइल बना था तब से एक या दो बार ही गया होगा साइट पे. कई फ्रेंड रिक्वेस्ट्स थी. एक प्रोफाइल पर वो रुका. प्रोफाइल एक लड़की की थी. नाम था सनम. कुछ तीस मिनिट्स पहले रिक्वेस्ट आई थी. एक खूबसूरत लड़की की फोटो लगी थी. उसने रिक्वेस्ट आक्सेप्ट कर लिया.

कुछ देर बाद उसने फिर फोन उठाया. कॉल किया और फोन रिसिव हो गया.

फोन कॉल | एक अनोखे प्यार की दास्तान | पार्ट  02

आबान – हेलो आप सनम बोले रही हैं ?

सनम – नहीं चुड़ैल बोल रही हूँ. आपका कॉल, दोज़ख़् मे लगा है. मैं यहाँ की हेड चुड़ैल बोल रही हूँ.

जवाब मैं आबान हँसने लगा.

सनम – यह क्या हो गया तुमको. कहीं तुम पागल तो नहीं हो और मैने पहले किसी पागल कहने का नंबर तो डाइयल नहीं कर दिया था. अब मेरा क्या होगा. रोज़ पागलों के फोन आएँगे. या मेरे खुदा अब मेरा क्या होगा!

आबान – मैं पागल नहीं हूँ , बस आपके जवाब पर हँसी आ गयी थी.

सनम – हर पागल यही कहता है की वो पागल नहीं है.

आबान – छोड़िए यह फालतू की बात. अपने एक दम फोन रख दिया था?

सनम – हाँ रख दिया था मेरा फोन मेरा मूड. और वैसे भी आप क्यों मुझे कॉल कर रहे थे, आप तो अंजान लोगों से बात भी नहीं करते.

आबान – फिर आपने अब क्यों उठाया फोन ?

सनम – तुम्हे यह बताने के लिए की जनाब अब कॉल ना करना. मुझे भी अंजान लोगों से बात नहीं करनी है.

आबान – पर अब तो हम दोस्त हैं. आपकी रिक्वेस्ट भी मैने आक्सेप्ट कर ली है.

सनम – तो क्या अपने मुझ पर एहसान किया है. मैं अभी आपको रिमूव कर देती हूँ अपने अकाउंट से. मुझे ऐसे लोग पसंद नहीं जो दोस्ती करने मैं इतना भाव खाते हैं.

आबान – सॉरी सनम. मुझसे ग़लती हो गयी. अगर मुझे बात ना करनी होती तो क्या मैं आपको कॉल करता. आप बताइए.

आबान को मालूम नही क्या हुवा था की वो बिना किसी वजह सनम से माफी माँगने लगा. अभी कुछ देर पहले ही तो उसकी बात हुई थी या कहिए की हल्की बहेस. अब वो सनम से बात करना चाहता था और उसको जानना चाहता था. अपनी ज़िंदगी के इतने साल उसने कभी ऐसा महसूस नही किया था. एक अजीब स एहसास था जो उसको समझ नही आ रहा था. बस वो सनम की तरफ झुका जा रहा था.

 ऐसा नही था की वो किरदार से अच्छा नही था. उसका किरदार बहुत पाक था. लोग उसकी इज़्ज़त करते थे. बस वो हुमेशा रिज़र्व रहता था. क्यूँ ! इसका जवाब तो मुश्किल हैं. बस यूँ ही था उसका मिजाज़.

सनम कुछ सोचते हुवे अंदाज़ मे बोली – ह्म्‍म्म्म बात मैं दम है आपकी. लेकिन आपको सज़ा मिलेगी. आपको उठक बैठक करनी पड़ेगी.

आबान – मंज़ूर है पर फोन पर उठक बैठक कैसे करूँ, चुड़ैल आंटी ?

सनम ने बनावटी गुस्से से बोला – क्या बोला तुमने मुझे ? चुड़ैल ! अभी फोन से निकल कर तुम्हारा खून पीती हूँ.

आबान – खुसकिस्मत होंगे हम जो आप जैसी खूबसूरत चुड़ैल के हाथों मारे जाए !

सनम – या मेरे खुदा अब आप फ्लर्ट करने लगे. खैर आप ऑनलाइन आए और हम वीडियो कॉल पर आपकी उठक बैठक को देखते हैं.

आबान ने वेब सेशन कनेक्ट किया और अब दोनो आमने सामने थे.

हाँ तो अब आप आचे लड़के की तरह आपने कान पकड़ कर स्टार्ट हो जाइए. सनम ने हेस्ट हुवे ऑर्डर दिया

आबान – कितनी तक करनी है. यह तो बोलो चुड़ैल आंटी.

सनम – मेरी मर्ज़ी , मुझे जब लगेगा तब रोक दूँगी. चलो बातें बंद और उठक बैठक शुरू करो.

सनम – ठीक से करो, फर्स्ट टाइमर हो क्या. स्कूल मैं कभी नहीं किया क्या ?

आबान – वो क्या है ना चुड़ैल आंटी की मैं स्कूल मैं अच्छा बच्चा था. सो मुझे आइडिया कम है इन सबका.

सनम – ठीक है ठीक है. करते रहो, बड़े आए अच्छे बच्चे. चलो 20 बार करो. मेरा मूड आज कम खराब है, वरना 100 तो पक्का करवाती तुमसे.

आबान – जी मेरी किस्मत अच्छी थी जो मैं आपके गुस्से का ज़यादा शिकार नहीं हुआ .

इस तरह कुछ हल्की फुल्की नोक झोक के बाद दोनो मे दोस्ती शूरू हो गयी.

फोन कॉल | एक अनोखे प्यार की दास्तान | पार्ट 03

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